मटर की खेती: आधुनिक तकनीक, संतुलित पोषण और अधिक उत्पादन का सम्पूर्ण मार्गदर्शन
मटर भारत की प्रमुख दलहनी और सब्जी फसलों में से एक है। इसे Pea या Garden Pea के नाम से भी जाना जाता है। मटर का उपयोग हरी सब्जी, दाल, सूखी मटर, फ्रोजन फूड, प्रोसेसिंग, स्नैक्स और पशु आहार तक में किया जाता है। हरी मटर की मांग सर्दी के मौसम में बहुत अधिक रहती है और अच्छी गुणवत्ता वाली कोमल, मीठी और भरी हुई फलियों का बाजार भाव बेहतर मिलता है। मटर कम अवधि में तैयार होने वाली फसल है, इसलिए किसान सही तकनीक अपनाकर कम समय में अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
मटर की खेती में अच्छी पैदावार के लिए सही किस्म, स्वस्थ बीज, बीज उपचार, अच्छी खेत तैयारी, संतुलित पोषण, उचित सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, रोग-कीट प्रबंधन और सही समय पर तुड़ाई बहुत जरूरी है। मटर में मजबूत जड़ें, अच्छी गांठें, हरी पत्तियां, अधिक फूल, बेहतर फल सेटिंग, भरी हुई फलियां और दानों का अच्छा विकास किसान की आय को सीधे प्रभावित करते हैं।
मटर की खेती में साडा वीर (SadaVeer), 4जी साडावीर (4G Sadaveer), 5जी साडावीर (5G Sadaveer), साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray), फंगस फाइटर (Fungus Fighter) और फर्राटा (Farrata) का सही अवस्था में उपयोग करके अंकुरण, जड़ विकास, हरियाली, फूल, फलियां, दाना भराव, रोग प्रतिरोधक क्षमता और कुल उत्पादन को बेहतर बनाया जा सकता है।
मटर की खेती का महत्व
मटर दलहनी फसल होने के कारण मिट्टी की उर्वरता सुधारने में भी सहायक होती है। इसकी जड़ों में गांठें बनती हैं, जिनमें राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधों के उपयोग योग्य बनाते हैं। इससे फसल को नाइट्रोजन मिलती है और अगली फसल को भी लाभ हो सकता है। हरी मटर की खेती सब्जी के रूप में अधिक लाभकारी मानी जाती है क्योंकि बाजार में ताजी फलियों की मांग अधिक रहती है।
- कम अवधि में उत्पादन देने वाली लाभदायक फसल।
- हरी सब्जी और सूखी दाल दोनों रूप में उपयोगी।
- मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण में सहायक।
- सर्दी के मौसम में बाजार मांग अधिक।
- भरी हुई, कोमल और मीठी फलियों का अच्छा भाव मिलता है।
- संतुलित पोषण से फूल, फलियां और दाना भराव बेहतर होता है।
मटर के लिए उपयुक्त जलवायु
मटर ठंडी जलवायु की फसल है। इसके लिए हल्की ठंड और मध्यम तापमान उपयुक्त रहता है। बहुत अधिक गर्मी मटर के लिए हानिकारक होती है, क्योंकि इससे फूल झड़ सकते हैं और फलियों का विकास कमजोर हो सकता है। पाला और अधिक नमी भी कुछ अवस्थाओं में नुकसान कर सकते हैं। मटर में फूल और फलियां बनते समय मौसम संतुलित होना बहुत जरूरी है।
- अंकुरण तापमान: 18°C से 25°C
- वृद्धि तापमान: 15°C से 22°C
- मौसम: रबी मौसम
- धूप: पर्याप्त धूप आवश्यक
- जलभराव: मटर के लिए हानिकारक
मिट्टी का चयन
मटर की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है। मिट्टी भुरभुरी, उपजाऊ और जैविक पदार्थों से भरपूर होनी चाहिए। भारी मिट्टी में जलभराव होने पर जड़ सड़न और विल्ट जैसी समस्या बढ़ सकती है। बहुत हल्की मिट्टी में नमी जल्दी खत्म होती है, इसलिए सिंचाई और नमी संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। मिट्टी का pH लगभग 6.0 से 7.5 तक अच्छा माना जाता है।
यदि मिट्टी में जिंक, आयरन, मैंगनीज, बोरॉन, कॉपर या मैग्नीशियम की कमी हो तो मटर में पत्तियां पीली पड़ सकती हैं, पौधे कमजोर रह सकते हैं, फूल कम लग सकते हैं और फलियां ठीक से नहीं भरतीं। ऐसी स्थिति में साडा वीर (SadaVeer) सूक्ष्म पोषण उपलब्ध कराने और पौधों की संपूर्ण वृद्धि को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
खेत की तैयारी
मटर का बीज सीधा खेत में बोया जाता है, इसलिए खेत की तैयारी अच्छी होनी चाहिए। खेत में मिट्टी भुरभुरी, समतल और खरपतवार मुक्त होनी चाहिए। अधिक गहरी जुताई के बाद 2 से 3 हल्की जुताई करके खेत को तैयार करें। अच्छी सड़ी गोबर खाद या कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी की संरचना सुधरती है और जड़ों को अच्छा वातावरण मिलता है।
- पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें।
- इसके बाद 2 से 3 जुताई कल्टीवेटर या रोटावेटर से करें।
- खेत से पुराने फसल अवशेष और खरपतवार हटाएं।
- सड़ी हुई गोबर खाद या कम्पोस्ट मिलाएं।
- अंतिम जुताई के बाद पाटा लगाकर खेत समतल करें।
- जल निकासी के लिए नालियां बनाएं।
- अधिक नमी वाले क्षेत्र में उठी हुई क्यारियां लाभकारी रहती हैं।
खेत की तैयारी या पहली सिंचाई के समय फर्राटा (Farrata) का उपयोग पानी की बेहतर पैठ, नमी संरक्षण और उर्वरकों की दक्षता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। मटर में फूल और फलियों की अवस्था में नमी का संतुलन बहुत जरूरी होता है, इसलिए फर्राटा (Farrata) पानी और पोषण के बेहतर उपयोग में मदद कर सकता है।
फर्राटा (Farrata) के लाभ
- मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनाए रखने में सहायक।
- पानी को जड़ क्षेत्र तक पहुंचाने में मदद।
- उर्वरकों की उपयोग क्षमता बढ़ाने में सहायक।
- मिट्टी को भुरभुरा और हवादार बनाने में मदद।
- कम पानी में बेहतर परिणाम देने में सहायक।
- जड़ विकास और दाना भराव में नमी support प्रदान करता है।
मटर की प्रमुख किस्में
मटर की किस्म का चयन क्षेत्र, मौसम, बाजार मांग, फली की लंबाई, दाने की मिठास, उत्पादन क्षमता और रोग सहनशीलता के आधार पर करना चाहिए। सब्जी मटर और दाल मटर की किस्में अलग-अलग हो सकती हैं। हरी मटर के लिए ऐसी किस्म चुनें जिसकी फलियां लंबी, कोमल, हरी और दाने भरे हुए हों।
प्रमुख किस्में
- अर्केल
- बोनविला
- आजाद पी-1
- पूसा प्रगति
- पूसा श्री
- कशी नंदिनी
- मालवीय मटर
- पंत मटर
- हाइब्रिड/उन्नत सब्जी मटर किस्में
- क्षेत्र अनुसार अनुशंसित स्थानीय किस्में
बीज दर और बुवाई
मटर में अच्छी पैदावार के लिए स्वस्थ, प्रमाणित और उच्च अंकुरण क्षमता वाला बीज उपयोग करें। बीज रोगमुक्त होना चाहिए। छोटे, सिकुड़े, टूटे या रोगग्रस्त बीज का उपयोग नहीं करना चाहिए। लाइन में बुवाई करने से पौधों को हवा और धूप अच्छी मिलती है तथा निराई-गुड़ाई और छिड़काव आसान होता है।
- बीज दर: 35 से 45 किलोग्राम प्रति एकड़, किस्म और उद्देश्य अनुसार।
- लाइन से लाइन दूरी: 30 से 45 सेमी।
- पौधे से पौधे दूरी: 8 से 10 सेमी।
- बीज गहराई: 4 से 5 सेमी।
- बुवाई विधि: लाइन में बुवाई सर्वोत्तम।
बुवाई का सही समय
मटर की बुवाई रबी मौसम में की जाती है। समय पर बुवाई करने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है और फूल-फलियों की अवस्था उपयुक्त मौसम में आती है। बहुत देर से बुवाई करने पर गर्मी बढ़ने से फलियां कम बन सकती हैं और दाना भराव कमजोर हो सकता है।
| क्षेत्र/स्थिति | बुवाई का समय | विशेष बात |
|---|---|---|
| उत्तर भारत | अक्टूबर से नवंबर | सब्जी मटर के लिए उपयुक्त |
| मैदानी क्षेत्र | अक्टूबर अंत से नवंबर | समय पर बुवाई अधिक लाभकारी |
| देर वाली बुवाई | दिसंबर तक | उत्पादन घट सकता है |
| पहाड़ी क्षेत्र | स्थानीय मौसम अनुसार | क्षेत्रीय सलाह लें |
बीज उपचार
मटर में बीज उपचार बहुत महत्वपूर्ण है। इससे अंकुरण बेहतर होता है, शुरुआती रोगों से बचाव मिलता है और पौधे मजबूत बनते हैं। मटर दलहनी फसल है, इसलिए राइजोबियम कल्चर से बीज उपचार करने पर जड़ों में गांठें अच्छी बनती हैं और नाइट्रोजन स्थिरीकरण बेहतर हो सकता है। बीज उपचार के बाद बीज को छाया में सुखाकर बुवाई करें।
बीज उपचार या शुरुआती वृद्धि में 4जी साडावीर (4G Sadaveer) का उपयोग जड़ विकास और पौधों की शुरुआती सक्रियता में सहायक हो सकता है। यह समुद्री शैवाल और ऑर्गेनिक एसिड आधारित उत्पाद है, जो पौधों को प्राकृतिक growth support देता है।
4जी साडावीर (4G Sadaveer) के लाभ
- अंकुरण और शुरुआती वृद्धि को support करता है।
- जड़ विकास को प्रोत्साहित करता है।
- पौधों को शुरुआती ताकत देता है।
- नमी या ठंड तनाव से उबरने में मदद करता है।
- हरी पत्तियों और सक्रिय वृद्धि को बढ़ावा देता है।
- फूल और फलियों की तैयारी में पौधों को मजबूत बनाता है।
मटर में पोषण प्रबंधन
मटर दलहनी फसल होने के कारण नाइट्रोजन की आवश्यकता अनाज फसलों की तुलना में कम होती है, लेकिन फास्फोरस, पोटाश, सल्फर और सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। फास्फोरस जड़ विकास और गांठ बनने में मदद करता है। पोटाश पौधों की रोग सहनशीलता, फूल, फली और दाना भराव में सहायक होता है। बोरॉन और जिंक फूल और दाना विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्य पोषक तत्व
- नाइट्रोजन – शुरुआती वृद्धि के लिए सीमित मात्रा में।
- फास्फोरस – जड़ विकास और गांठों के लिए।
- पोटाश – फली गुणवत्ता और दाना भराव के लिए।
- सल्फर – दलहनी फसलों में प्रोटीन निर्माण के लिए।
- कैल्शियम – पौध मजबूती और जड़ स्वास्थ्य के लिए।
- बोरॉन – फूल और फली सेटिंग के लिए।
- जिंक और आयरन – हरियाली और पौध सक्रियता के लिए।
साडा वीर (SadaVeer) मटर में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को कम करने और पौधों की संपूर्ण वृद्धि को मजबूत करने में सहायक है। यह जड़ों की वृद्धि, पत्तियों की हरियाली, फूल और फली सेटिंग में मदद कर सकता है।
साडा वीर (SadaVeer) के लाभ
- जड़ विकास को बढ़ावा देता है।
- पत्तियों की हरियाली बनाए रखने में सहायक।
- सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी में मदद करता है।
- फूल और फली सेटिंग को support करता है।
- दाना भराव और उत्पादन गुणवत्ता सुधारने में सहायक।
- पौधों की आंतरिक ताकत बढ़ाने में उपयोगी।
प्रारंभिक वृद्धि अवस्था
बुवाई के बाद 15 से 25 दिन की अवस्था मटर के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। इस समय पौधे की जड़ें विकसित होती हैं और पौधा खेत में स्थापित होता है। यदि इस अवस्था में पौधे कमजोर रह जाएं तो आगे फूल कम लग सकते हैं और फली सेटिंग कमजोर हो सकती है।
इस अवस्था में 4जी साडावीर (4G Sadaveer) और साडा वीर (SadaVeer) का उपयोग जड़ विकास, पौध सक्रियता और शुरुआती वृद्धि में सहायक हो सकता है। यदि खेत में नमी की समस्या है तो सिंचाई के साथ फर्राटा (Farrata) उपयोगी हो सकता है।
शाखा और पत्ती विकास अवस्था
मटर में स्वस्थ पत्तियां और मजबूत पौधा अच्छे उत्पादन की नींव रखते हैं। पत्तियां जितनी हरी और सक्रिय रहेंगी, पौधा उतना अधिक भोजन बनाएगा और फूल-फली उत्पादन बेहतर होगा। कमजोर पौधों में फूल कम आते हैं और फलियां छोटी रह सकती हैं।
5जी साडावीर (5G Sadaveer), 4जी साडावीर (4G Sadaveer) और साडा वीर (SadaVeer) का उपयोग पत्तियों की हरियाली, शाखा विकास और growth activity बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
जड़ गांठ और नाइट्रोजन स्थिरीकरण
मटर की जड़ों में बनने वाली गांठें फसल के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं। ये गांठें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को पौधे के उपयोग योग्य रूप में बदलने में सहायता करती हैं। यदि मिट्टी में नमी, फास्फोरस और सूक्ष्म पोषण अच्छा हो तो गांठों का विकास बेहतर हो सकता है। जलभराव, अत्यधिक नाइट्रोजन और कमजोर जड़ विकास गांठों को प्रभावित कर सकते हैं।
- राइजोबियम कल्चर से बीज उपचार लाभकारी है।
- फास्फोरस और सल्फर का संतुलित उपयोग करें।
- जलभराव से बचें।
- जड़ों को मजबूत रखने के लिए जैविक खाद उपयोग करें।
- शुरुआती अवस्था में 4जी साडावीर (4G Sadaveer) उपयोगी हो सकता है।
पत्तियों का पीला होना
मटर में पत्तियों का पीला होना पोषण कमी, जड़ रोग, जलभराव, वायरस रोग या रस चूसक कीटों के कारण हो सकता है। यदि पीलापन सूक्ष्म पोषण कमी के कारण है तो पर्णीय छिड़काव से तेजी से सुधार मिल सकता है। लेकिन यदि पौधे मुरझा रहे हों या जड़ें काली पड़ रही हों तो रोग की जांच भी जरूरी है।
साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray) पत्तियों के माध्यम से पोषण देने के लिए उपयोगी है। इसे 1–2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। किसी भी कीटनाशक या फफूंदनाशी के साथ मिलाने से पहले compatibility test जरूर करें।
साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray) के लाभ
- पत्तियों की हरियाली बढ़ाने में सहायक।
- प्रकाश संश्लेषण को बेहतर करता है।
- सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी में मदद।
- तनावग्रस्त पौधों को सक्रिय करने में सहायक।
- फूल और फली सेटिंग को support करता है।
फूल आने और फली सेटिंग
मटर में फूल आने की अवस्था उत्पादन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इस समय पौधे को संतुलित पोषण, पर्याप्त नमी और रोग-कीट से सुरक्षा चाहिए। पानी की कमी, तापमान तनाव, पोषण कमी या कीट प्रकोप से फूल झड़ सकते हैं और फलियां कम बन सकती हैं।
फूल आने से पहले और फूल अवस्था में साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray), 5जी साडावीर (5G Sadaveer) और 4जी साडावीर (4G Sadaveer) का उपयोग पौधों की सक्रियता, फूल संरक्षण और फली सेटिंग में सहायक हो सकता है।
फली विकास और दाना भराव
मटर में फली की लंबाई, दानों की संख्या, दानों का आकार, मिठास और कोमलता बाजार मूल्य को प्रभावित करते हैं। फली विकास अवस्था में पोटाश, बोरॉन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता बढ़ जाती है। पानी की कमी से फलियां छोटी और दाने सिकुड़े रह सकते हैं।
इस अवस्था में साडा वीर (SadaVeer), साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray) और 5जी साडावीर (5G Sadaveer) का संतुलित उपयोग फली विकास, दाना भराव, चमक और गुणवत्ता को support कर सकता है।
सिंचाई प्रबंधन
मटर में सिंचाई का सही समय बहुत महत्वपूर्ण है। अधिक पानी देने से जड़ रोग बढ़ सकते हैं और कम पानी देने से फूल झड़ सकते हैं। पहली सिंचाई सामान्यतः बुवाई के बाद नमी की स्थिति के अनुसार करें। फूल और फली बनने की अवस्था में नमी की कमी नहीं होनी चाहिए।
- बुवाई के बाद मिट्टी में पर्याप्त नमी रखें।
- पहली सिंचाई 20–25 दिन बाद, आवश्यकता अनुसार।
- फूल अवस्था में नमी की कमी न होने दें।
- फली और दाना भराव अवस्था में सिंचाई महत्वपूर्ण है।
- जलभराव से पूरी तरह बचाव करें।
- हल्की और समय पर सिंचाई करें।
सिंचाई के साथ फर्राटा (Farrata) का उपयोग पानी की पैठ, नमी संरक्षण और उर्वरकों की दक्षता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
खरपतवार नियंत्रण
मटर की शुरुआती अवस्था में खरपतवार बहुत नुकसान करते हैं। खरपतवार पौधों से पानी, पोषण और प्रकाश छीनते हैं। यदि शुरुआती 30 से 35 दिन खेत खरपतवार मुक्त रहे तो पौधों की वृद्धि अच्छी होती है। लाइन में बुवाई करने से निराई-गुड़ाई आसान होती है।
- बुवाई के 20–25 दिन बाद पहली निराई करें।
- 35–40 दिन बाद दूसरी निराई करें।
- लाइन में बुवाई करने से खरपतवार नियंत्रण आसान होता है।
- खरपतवारनाशी का उपयोग विशेषज्ञ सलाह से करें।
- खेत की मेड़ों को भी खरपतवार मुक्त रखें।
मटर में प्रमुख रोग
मटर में फफूंद, जीवाणु और वायरस जनित रोग नुकसान कर सकते हैं। ठंड और अधिक नमी वाले मौसम में पाउडरी मिल्ड्यू, डाउनy मिल्ड्यू, रस्ट, विल्ट और जड़ सड़न जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। स्वस्थ बीज, बीज उपचार, जल निकासी और संतुलित पोषण रोग प्रबंधन में महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य रोग
- पाउडरी मिल्ड्यू
- डाउनy मिल्ड्यू
- रस्ट
- फ्यूजेरियम विल्ट
- जड़ सड़न
- एन्थ्रेक्नोज
- वायरस रोग
फंगस फाइटर (Fungus Fighter) फफूंद जनित रोगों से सुरक्षा और पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकता है। मटर में जड़ सड़न, पत्ती धब्बा, पाउडरी मिल्ड्यू, रस्ट या विल्ट जैसी समस्या की संभावना होने पर इसे रोग प्रबंधन कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।
फंगस फाइटर (Fungus Fighter) के लाभ
- फफूंद रोगों से सुरक्षा में सहायक।
- पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद।
- जड़ों और पत्तियों को स्वस्थ रखने में सहायक।
- फूल और फली अवस्था में फसल सुरक्षा में उपयोगी।
- उत्पादन हानि कम करने में मदद।
मटर में प्रमुख कीट
मटर में माहू, फली छेदक, पत्ती सुरंगक, थ्रिप्स, सफेद मक्खी और कटवर्म नुकसान कर सकते हैं। माहू रस चूसकर पौधों को कमजोर करते हैं और वायरस रोग फैलाने में भी भूमिका निभा सकते हैं। फली छेदक फलियों में घुसकर दानों को नुकसान पहुंचा सकता है।
मुख्य कीट
- माहू
- फली छेदक
- पत्ती सुरंगक
- थ्रिप्स
- सफेद मक्खी
- कटवर्म
कीट नियंत्रण के लिए नियमित निगरानी करें। पीले sticky traps लगाएं। फली छेदक के लिए समय पर नियंत्रण करें। जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से कीटनाशक उपयोग करें। किसी भी कीटनाशक के साथ साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray) मिलाने से पहले compatibility test अवश्य करें।
मटर के लिए सम्पूर्ण उत्पाद उपयोग शेड्यूल
| फसल अवस्था | उत्पाद | मात्रा/उपयोग | लाभ |
|---|---|---|---|
| खेत तैयारी / पहली सिंचाई | फर्राटा (Farrata) | 250 मिली प्रति एकड़ या सलाह अनुसार | नमी संरक्षण, पानी की पैठ, उर्वरक दक्षता |
| बीज उपचार / शुरुआती अवस्था | 4जी साडावीर (4G Sadaveer) | 2–4 मिली प्रति लीटर पानी | अंकुरण, जड़ विकास, शुरुआती ताकत |
| प्रारंभिक वृद्धि | साडा वीर (SadaVeer) | अनुशंसित मात्रा | सूक्ष्म पोषण, हरियाली, जड़ विकास |
| शाखा और पत्ती विकास | 5जी साडावीर (5G Sadaveer) | सलाह अनुसार | पौध सक्रियता, हरियाली, फूल तैयारी |
| पीलापन / पोषण कमी | साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray) | 1–2 ग्राम प्रति लीटर पानी | तेज पोषण, हरियाली, प्रकाश संश्लेषण |
| रोग संभावना | फंगस फाइटर (Fungus Fighter) | 2 ग्राम प्रति लीटर पानी या सलाह अनुसार | फफूंद रोग प्रबंधन, रोग प्रतिरोधक क्षमता |
| फूल और फली सेटिंग | साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray) + 5जी साडावीर (5G Sadaveer) | सलाह अनुसार | फूल संरक्षण, फली सेटिंग, पौध सक्रियता |
| फली विकास और दाना भराव | साडा वीर (SadaVeer) + साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray) | सलाह अनुसार | फली लंबाई, दाना भराव, चमक और उत्पादन |
तुड़ाई और उत्पादन
हरी मटर की तुड़ाई तब करनी चाहिए जब फलियां पूरी तरह विकसित हो जाएं और दाने भरे हुए हों, लेकिन दाने अधिक कठोर न हुए हों। बहुत देर से तुड़ाई करने पर फलियां कठोर हो जाती हैं और मिठास कम हो सकती है। हरी मटर में 2–3 बार तुड़ाई की जा सकती है। सूखी मटर के लिए फसल को पकने के बाद काटा जाता है।
- हरी मटर की फलियां कोमल अवस्था में तोड़ें।
- फलियां भरी हुई और चमकदार होनी चाहिए।
- बहुत पुरानी और कठोर फलियां न छोड़ें।
- 2–3 बार तुड़ाई संभव हो सकती है।
- रोगग्रस्त फलियां अलग करें।
- बाजार के अनुसार grading और packing करें।
मटर में सामान्य समस्याएं और समाधान
1. मटर में अंकुरण कम होना
अंकुरण कम होने का कारण खराब बीज, अधिक गहराई, सूखी मिट्टी, जलभराव या बीज रोग हो सकता है। स्वस्थ बीज, बीज उपचार और 4जी साडावीर (4G Sadaveer) का उपयोग शुरुआती वृद्धि में सहायक हो सकता है।
2. मटर में पत्तियां पीली होना
पीलापन पोषण कमी, जलभराव, जड़ रोग या वायरस रोग के कारण हो सकता है। साडा वीर (SadaVeer) और साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray) पोषण कमी में सहायक हो सकते हैं।
3. फूल झड़ना
फूल झड़ने का कारण पानी की कमी, तापमान तनाव, पोषण कमी या कीट प्रकोप हो सकता है। फूल अवस्था में साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray), 5जी साडावीर (5G Sadaveer) और संतुलित पोषण उपयोगी हो सकते हैं।
4. फलियां छोटी या खाली रहना
फलियां छोटी या खाली रहने का कारण परागण समस्या, पोषण कमी, पानी की कमी या रोग-कीट प्रकोप हो सकता है। फली विकास अवस्था में साडा वीर (SadaVeer), साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray) और सही सिंचाई लाभकारी हो सकते हैं।
5. पत्तियों पर सफेद चूर्ण
यह पाउडरी मिल्ड्यू का लक्षण हो सकता है। फंगस फाइटर (Fungus Fighter) को रोग प्रबंधन कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है और कृषि विशेषज्ञ की सलाह अनुसार छिड़काव करें।
मटर में अधिक उत्पादन के लिए विशेष सुझाव
- प्रमाणित और स्वस्थ बीज का उपयोग करें।
- बीज उपचार अवश्य करें।
- राइजोबियम कल्चर का उपयोग लाभकारी हो सकता है।
- खेत में जलभराव न होने दें।
- शुरुआती 30–35 दिन खरपतवार नियंत्रण करें।
- फूल और फली अवस्था में नमी की कमी न होने दें।
- माहू और फली छेदक की नियमित निगरानी करें।
- हरी मटर की समय पर तुड़ाई करें।
- सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी न होने दें।
- साडा वीर (SadaVeer), 4जी साडावीर (4G Sadaveer), 5जी साडावीर (5G Sadaveer), साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray), फंगस फाइटर (Fungus Fighter) और फर्राटा (Farrata) का सही अवस्था में उपयोग करें।
FAQ: मटर की खेती
मटर की बुवाई कब करनी चाहिए?
मटर की बुवाई सामान्यतः अक्टूबर से नवंबर में की जाती है। स्थानीय मौसम और किस्म के अनुसार समय बदल सकता है। देर से बुवाई करने पर उत्पादन कम हो सकता है।
मटर में साडा वीर (SadaVeer) कब उपयोग करें?
साडा वीर (SadaVeer) का उपयोग प्रारंभिक वृद्धि, पीलापन, फूल और फली विकास अवस्था में सूक्ष्म पोषण के लिए किया जा सकता है।
मटर में 4जी साडावीर (4G Sadaveer) का क्या लाभ है?
4जी साडावीर (4G Sadaveer) अंकुरण, जड़ विकास, शुरुआती वृद्धि और पौध सक्रियता में सहायक हो सकता है।
मटर में 5जी साडावीर (5G Sadaveer) कब उपयोग करें?
5जी साडावीर (5G Sadaveer) शाखा विकास, हरियाली, फूल और फली सेटिंग अवस्था में उपयोगी हो सकता है।
मटर में फंगस फाइटर (Fungus Fighter) कब देना चाहिए?
जड़ सड़न, पत्ती धब्बा, पाउडरी मिल्ड्यू, रस्ट या फफूंद रोगों की संभावना होने पर फंगस फाइटर (Fungus Fighter) उपयोगी हो सकता है।
मटर में फर्राटा (Farrata) क्यों उपयोगी है?
फर्राटा (Farrata) पानी की पैठ, नमी संरक्षण और उर्वरकों की दक्षता बढ़ाने में सहायक है। मटर में फूल और फली विकास के लिए नमी प्रबंधन महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
मटर की खेती किसानों के लिए कम अवधि में अच्छा लाभ देने वाली महत्वपूर्ण दलहनी और सब्जी फसल है। इसकी सफलता सही किस्म, स्वस्थ बीज, बीज उपचार, अच्छी खेत तैयारी, संतुलित पोषण, उचित सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, रोग-कीट नियंत्रण और समय पर तुड़ाई पर निर्भर करती है। मटर में शुरुआती जड़ विकास, जड़ गांठ, हरियाली, फूल, फली सेटिंग और दाना भराव सबसे महत्वपूर्ण अवस्थाएं हैं।
साडा वीर (SadaVeer), 4जी साडावीर (4G Sadaveer), 5जी साडावीर (5G Sadaveer), साडावीर स्प्रे (Sadaveer Spray), फंगस फाइटर (Fungus Fighter) और फर्राटा (Farrata) का सही अवस्था में उपयोग करके किसान मटर में बेहतर अंकुरण, मजबूत जड़ें, हरी पत्तियां, अधिक फूल, बेहतर फली सेटिंग, भरी हुई फलियां, रोग से सुरक्षा और अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
“साडा वीर का ये है वादा, लागत कम मुनाफा ज्यादा”